फिल्म रिव्यू- भूत: द हॉन्टेड शिप

कहानी :-
एक लड़का है पृथ्वी. पेशे से शिपिंग ऑफिसर है. लेकिन बेचारा बड़ी पर्सनल ट्रैजेडी से गुज़र रहा है. उसे कुछ ऐसी भी चीज़ें दिखने लगती हैं, जो दरअसल हैं ही नहीं. मतलब हैलुसिनेट करने लगता है. इसी दौरान मुंबई के जूहू बीच पर एक शिप आकर रुकती है, जिसमें एक भी इंसान नहीं है. पृथ्वी उसकी जांच-पड़ताल करने जाता है. वहां भी उसे कुछ अजीबोगरीब चीज़ें दिखाई और सुनाई देती हैं. लेकिन वो किसी को बता नहीं सकता क्योंकि उसके हैलुसिनेशन का इलाज चल रहा है. एक बार वो शिप पर अपने साथी ऑफिसर और बेस्ट फ्रेंड रियाज़ को लेकर जाता है. वहां दोनों कुछ ऐसा देखते हैं, जिस पर विश्वास करना मुश्किल है. यानी भूत. अब वो भूत कौन है? वो भूत बना कैसे? और वो जाएगा कैसे? इसी बारे में है ‘भूत- द हॉन्टेड शिप’. इसमें ढेर सारी बैकस्टोरीज़ हैं, जिन पर यकीन करना उतना ही मुश्किल है, जितना पृथ्वी और रियाज़ का उस प्रणीनुमा दिखने वाले भूत पर.

फिल्म में विकी कौशल ने पृथ्वी नाम के शिपिंग ऑफिसर का रोल किया है. एक्चुअली वो फिल्म रूपी चांद के लिए भी पृथ्वी सरीखे ही हैं. क्योंकि फिल्म उन्हीं के चारों ओर चक्कर मारती रहती है. वो आदमी पूरी फिल्म में कंसिस्टेंटली अच्छा काम करता है. लेकिन उनका कैरेक्टर पूरी फिल्म में एक ही ज़ोन में रहता है, जिसमें ज़ाहिर तौर पर उनकी कोई गलती नहीं है. फिल्म में भूमि पेडणेकर का कैमियो है. इन दोनों के अलावा आशुतोष राणा भी फिल्म का हिस्सा हैं. वो प्रोफेसर बने हैं. लेकिन उनका रोल फिल्म में भूमि के कैमियो से भी छोटा है. तिस पर वो जिस सीन में दिखते हैं, उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया.

‘भूत- हॉन्टेड शिप’ को डेब्यूटेंट डायरेक्टर भानु प्रताप सिंह ने डायरेक्ट किया है. पैसे लगाए हैं करण जौहर ने. लेकिन समझ नहीं आता कि करण को इस फिल्म में ऐसा क्या अलग दिख गया, जो फिल्म देखने वालों की नज़र से बच जा रहा है. ये फिल्म देखना मेरे लिए बहुत सरप्राइज़िंग अनुभव रहा. थिएटर में हॉरर फिल्म चल रही है और लोग हंस रहे हैं. किसी औसत कॉमेडी फिल्म जैसे. मैं मेंटली तैयार होकर थिएटर पहुंचा कि आज तो बहुत डरना है. वहां जाकर मैं अपने दिमाग से भिड़ा पड़ा हूं कि मुझे डर क्यों नहीं लग रहा. आम तौर पर हॉरर फिल्में देखकर वॉशरूम में पीछे मुड़ने में भी डर लगता है. फिल्म के ट्रेलर ने धमकाया था कि बहुत डर लगने वाला है. देखते वक्त मैं बार-बार फिल्म से कह रहा था-

इस भूत को यहां देखकर भले डर लगे, फिल्म देखते वक्त बिलकुल नहीं लगता. विज़ुअल्स से डर नहीं लगता साहब बैकग्राउंड म्यूज़िक से लगता है.

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