आम आदमी पार्टी की दिल्ली चुनाव जीतने की पांच वजह ……..

11 फरवरी को आए नतीजों में ये नारा सच साबित हो गया. दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी सरकार बनने जा रही है. अरविंद केजरीवाल तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. शीला दीक्षित के बाद केजरीवाल दिल्ली के दूसरे ऐसे सीएम होंगे, जो तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. आखिर AAP ने ऐसा क्या करिश्मा कर दिया कि 2013, 2015 और अब 2020 में फिर से सत्ता पर काबिज होने जा रही है.

  • दिल्ली में सरकार बनने के बाद केजरीवाल ने हर घर के लिए 20 हजार लीटर पानी फ्री कर दिया. 2020 का चुनाव आते-आते 200 यूनिट बिजली फ्री कर दी. आम आदमी पार्टी का दावा है कि 31 लाख घरों में बिजली का बिल शून्य आता है. बसों में महिलाओं के लिए यात्रा फ्री कर दी. अस्पतालों में लोगों का इलाज फ्री कर दिया. कुछ शर्तों के साथ प्राइवेट अस्पतालों में इलाज और जांच कराने पर लोगों के पैसे नहीं लगते. इसका फायदा केजरीवाल को चुनाव में मिला.

ग्राउंड पर रिपोर्टिंग के दौरान भी हमें यही देखने को मिला. लोगों से यह पूछने पर कि केजरीवाल ने क्या किया है, पहला जवाब यही मिलता है कि उन्होंने बिजली फ्री कर दी. पानी का बिल नहीं आता. मोहल्ला क्लिनिक में इलाज फ्री में हो जाता है.

  • There is Modi only. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने ये नरेटिव तैयार किया. इसी पर चुनाव लड़ा. घर-घर मोदी का नारा गूंजा और बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाने में कामयाब रही. 5 साल बाद एक बार फिर बीजेपी ने There is Modi only के नरेटिव पर चुनाव लड़ा और 2014 से बड़ी जीत हासिल की.

आम आदमी पार्टी और केजरीवाल ने इस तरह का नैरेटिव दिल्ली चुनाव में सेट किया. There is kejriwal only. यानी जो हैं, केजरीवाल ही हैं. अच्छे बीते पांच साल, लगे रहो केजरीवाल का नारा गढ़ा गया. जनता को ये भरोसा दिलाया गया कि केजरीवाल ही हैं, जो आपका भला कर सकते हैं. हर जगह केजरीवाल के चेहरे को ही आगे रखकर चुनाव लड़ा गया.

एक तरीके से आम आदमी पार्टी ने गुजरात मॉडल को दिल्ली के चुनाव में लागू किया. गुजरात के चुनाव में मोदी प्रचार के दौरान कहते थे कि 182 सीटों पर आप ईवीएम का बटन दबाएंगे, वोट सीधे मोदी को पड़ेगा. यही दिल्ली के चुनाव में भी देखने को मिला. आम आदमी के पास सरकार की योजनाएं पहुंचीं और केजरीवाल को सुप्रीम नेता के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया. बीच में कुछ नहीं था. यही कारण है कि 24 घंटे पहले आम आदमी पार्टी जॉइन करने वाले नेता भी जीत रहे हैं.

गुजरात में बीजेपी की तरह आम आदमी पार्टी ने अपने विधायकों के टिकट काटे. कांग्रेस और अन्य पार्टियों से आने वाले नेताओं को टिकट दिया और इतनी बड़ी जीत हासिल की.

  • बीजेपी ने इस चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया. शाहीन बाग में CAA के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन का जिक्र किया. अमित शाह ने कहा कि बटन ऐसा दबाइए कि करंट शाहीन बाग में महसूस हो. बीजेपी ने पाकिस्तान का जिक्र किया. ‘देश के गद्दारों को गोली मारो… को’ जैसे नारे दिए. कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का जिक्र किया. उसके नाम पर वोट मांगे. चुनाव से ठीक पहले राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट की घोषणा की. बीजेपी का जोर स्थानीय मुद्दों से ज्यादा राष्ट्रीय मुद्दों पर था.

वहीं आम आदमी पार्टी कभी भी जमीनी मुद्दों से नहीं भटकी. शाहीन बाग से दूरी बनाकर रखी. सिर्फ एक लाइन में ये कहा कि सड़क खाली होनी चाहिए. आम आदमी पार्टी की विचारधारा में स्पष्टता थी. उसने काम के दम पर वोट मांगा. फ्री बिजली, पानी, अस्पताल, स्कूल का जिक्र किया. लोगों की समस्याओं की बात की. पिछले 6 महीने में सिर्फ पार्टी लाइन के नैरेटिव पर चले. आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेता तक ने पार्टी लाइन से इतर जाकर कोई बात नहीं कही.

  • केजरीवाल ने बीजेपी और कांग्रेस के वोटरों को भी साधा. उन्होंने ये साफ संदेश देने की कोशिश कि हमें बीजेपी के वोटरों से परहेज नहीं है. दिल्ली में केजरीवाल का नारा दिया. केजरीवाल ने खुद कांग्रेस और बीजेपी के वोटरों से आम आदमी पार्टी को वोट देने की अपील की.  मीडिया के मंच से हनुमान चालीसा सुनाया. चुनाव से ठीक पहले हनुमान मंदिर गए. आम आदमी पार्टी ने सेक्युलर पार्टी के तौर पर खुद को प्रोजेक्ट तो किया, लेकिन उसने मुसलमानों की हिमायती पार्टी बनने की कोशिश नहीं की. मुसलमानों के मुद्दे पर खुलकर कुछ नहीं कहा. शाहीन बाग के मुद्दे पर चुप रहे. हर वो मुद्दे, जिससे AAP बीजेपी के ट्रैप में फंस सकती थी, केजरीवाल ने दूरी बनाकर रखी.  AAP ये मानकर चल रही थी कि कांग्रेस के कमजोर होने से अधिकांश मुस्लिम वोट आम आदमी पार्टी को मिलेंगे. और यही हुआ भी.

केजरीवाल ने सोशल मीडिया और मीडिया का इस्तेमाल मोदी की तरह ही किया. चुने हुए टीवी चैनलों और अखबरों को इंटरव्यू दिए. खासकर वोटिंग वाले दिन अखबारों में उनके इंटरव्यू छपे, जिससे जब लोग वोट देने जाएं, तो केजरीवाल का चेहरा उनके दिमाग में रहे.

  • आम आदमी पार्टी लोगों को ये भरोसा दिलाने में कामयाब रही कि दिल्ली में स्कूलों को लेकर बेहतर काम हुआ है. पहले से बढ़िया क्लासरूम, स्विमिंग पूल, खेल का मैदान. दिल्ली में सरकारी स्कूल में प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधा दी. दिल्ली सरकार का दावा है कि 20 हजार एक्स्ट्रा क्लासरूम बनवाए. शिक्षा का बजट बढ़ाया. सरकारी स्कूलों के रिजल्ट में सुधार किया. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता से इंटरैक्शन बढ़ाया. प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया. फीस बढ़ोतरी रोकी. इन सब का फायदा आम आदमी पार्टी को मिला.

आम आदमी पार्टी की सरकार ने लोगों की सेहत का भी खयाल रखा. मोहल्ला क्लिनिक, पॉली क्लिनिक और दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा दी. अगर सरकारी अस्पताल एक महीने से ज्यादा का वेटिंग पीरियड देते हैं, तो प्राइवेट अस्पतालों में लोग अपना इलाज करा सकते हैं. इसका खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी. हेल्थ पर किए गए काम का फायदा भी केजरीवाल को मिला.

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